नयी आमद

बिरजू महाराज के जीवन पर एक नज़र

राजेन्‍द्र शर्मा इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के निकट गाँव हदिया। इस गाँव में 989 परिवारों वाले कथक बिरादरी का ख़ानदान, जिसके मुखिया ईश्वरी प्रसाद। यह ख़ानदान खेतीबाड़ी और मंदिरों में गायन नर्तन के सहारे अपनी आजीविका जुटाता। इस ख़ानदान की गायन-नर्तन की एक विशिष्ट शैली में धार्मिक कथा के पात्रों के अनुसार लय और शरीर की भाव भंगिमाओं सम्मिलित …

कोरोना कैद के समय में ‘वैधानिक गल्प’

वीरेंद्र यादव प्रायः ऐसा कम होता है कि कोई कृति तुरंता समय के पार जाकर पाठक को उस टाइम जोन में अवस्थित कर दे जिसमें वह सचमुच जीने को अभिशप्त हो. चंदन पांडे की उपन्यासिका या लंबी कहानी ‘ वैधानिक गल्प’ का पढ़ना कोरोना कैद के पार जाकर उस वास्तविक समय को महसूस करना है, …

निर्मल वर्मा के आलोक में

मनोज मोहन जयशंकर 1989-2019 के तीस बरसों के अंतराल में पत्रिकाओं में लिखे-छपे गद्य को ‘गोधूलि की इबारतें’ में संकलित किया है। इस गद्य पुस्तक में उनके लिखे सृजनात्मक निबंध, संस्मरण, डायरी और टिप्पणियाँ हैं। उनकी भाषा इतनी संवेदनशील और उसका प्रवाह इतना प्रांजल है कि पूरी पुस्तक को एक साँस में पढ़ लिया जा सकता है। लेखक का स्वयं कहना …

‘कैनवस पर धूप’

इरा टाक लेखक, चित्रकार और फिल्मकार हैं। वर्तमान में मुंबई रह कर अपनी रचनात्मक यात्रा में लगी हैं। दो काव्य संग्रह – अनछुआ ख़्वाब, मेरे प्रिय, कहानी संग्रह – रात पहेली, नॉवेल – रिस्क @ इश्क़, मूर्ति, ऑडियो नावेल- गुस्ताख इश्क, लाइफ लेसन बुक्स- लाइफ सूत्र और RxLove366, ये काव्य संग्रह कैनवस पर धूप उनकी …

समय समाज की निर्मम समीक्षा :वैधानिक गल्प

पंकज मित्र वैसे तो चंदन पाण्डेय के पहले उपन्यास ‘वैधानिक गल्प’ की अति सरलीकृत व्याख्या यह हो सकती है कि यह लव जिहाद और भीड़ हत्या के विषय पर लिखा गया है परंतु भीड़ को हत्यारी भीड़ में बदलने और इस कौशल से बदलने कि भीड़ को अहसास भी न हो कब वह कातिल  भीड़ …

…क्योंकि ‘कथा’ से आगे जहाँ और भी हैं

असीम अग्रवाल स्वयं प्रकाश प्रतिष्ठित कथाकार हैं, यह सबको पता है, लेकिन उन्होंने ‘कथा-साहित्य’ से भी अलग लिखा है। उनकी नयी पुस्तक ‘धूप में नंगे पाँव’ इसी तरह की कथेतर रचना है, तथा कथेतर साहित्य की दृष्टि से एक ज़रूरी प्रयास है। यह नहीं कहा जा रहा कि ‘कथा-साहित्य’ की ज़रूरत नहीं, बल्कि साहित्य में …

सवालों में कथाकार

ललित कुमार श्रीमाली हिंदी के सुप्रसिद्ध कथाकार-उपन्यासकार स्वयं प्रकाश के साक्षात्कारों की पुस्तक कहा-सुना में पिछले बीस वर्षों की अवधि में लिए गए उन्नीस साक्षात्कारों का संकलन है। इन साक्षात्कारों से न केवल स्वयं प्रकाश के साहित्य को समझने में मदद मिलती है अपितु हम इसके माध्यम से इस समय व समाज को भी समझ सकते …