कोहवर

ज्योति चावला यह कहानी एक मुसीबत से शुरू होती है या फिर कहिए एक जिम्मेदारी से। अभी ढूंढने निकली हूं एक लडकी को जो गायब है पिछले कुछ दिनों से। जिसे किसी ने नहीं देखा है इन बीते कुछ दिनों में और घरवालों का दावा यह कि कल तक तो वह यहीं थी। कल रात …

क्या मैथिलीशरण गुप्त का सही मूल्यांकन नही हुआ?

विमल कुमार रज़ा फाउंडेशन ने गत दिनों जैनेंद्र, नागार्जुन, कृष्णा सोबती और रघुवीर सहाय की जीवनियां प्रकाशित की। इस कड़ी में रजनी गुप्त द्वारा लिखी राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जीवनी ‘कि याद जो करें सभी’ हाल ही में आई है। इन दिनों लखनऊ में एक बैंक मे कार्यरत रजनी जी की कहानियों और उपन्यासों से …

प्रतिरोध की नाट्ययात्रा का सूत्रधार

बालमुकुन्द आज के इस दौर में, जब एक नाट्य विधा के रूप में नुक्कड़ नाटकों की धार कमजोर हुई है, नुक्कड़ नाटकों के मसीहा सफ़दर हाश्मी को याद करना महज अपनी स्मृति को खंगालना या अपने नायकों के यशोगान की रस्मअदायगी भर नहीं है। यह प्रतिरोध की संस्कृति और उसकी ताकत को फिर से रेखांकित …

स्वीकृति और अस्वीकृति के द्वंद्व की कथा

अनिल अविश्रांत युद्ध में राजवंशों के जय-पराजय के रक्तिम वृतान्तों  के बीच इतिहास के ध्वांशेषों में कई बार बहुत सुन्दर प्रेम कथाओं की भी झलक मिलती है। इतिहास चाहे इन्हें महत्व न दे लेकिन जब एक साहित्यकार की दृष्टि इन पर पड़ती है तो ‘राजनटनी’ जैसी रचना जन्म लेती है। गीताश्री ने बारहवीं सदी के …

कश्यप महाराज

अनुराधापुर / सन् 480- 481 ईसवी वरिष्ठ कथाकार-ग़ज़लकार प्रियदर्शी ठाकुर ‘ख़याल’ जी की शीघ्र प्रकाश्य उपन्यास ‘सीगिरिया पुराण’ का एक महत्वपूर्ण अंश स्थविर तुषार जो रजत मंजूषा दे गए थे वह चाँदी की साधारण पेटी नहीं बल्कि किसी सिद्धहस्त कारीगर की कला का अद्भुत नमूना थी।।उसके ढक्कन पर अनुराधापुर का राज-चिह्न खुदा हुआ था और …

शिवरानी देवी प्रेमचंद से अधिक क्रांतिकारी थीं

विमल कुमार “अभी तक साहित्य जगत ने उनके (शिवरानी देवी) साथ न्याय नहीं किया क्योंकि मेरा व्यक्तित्व उनके व्यक्तित्व को ढक लेता है। शायद कुछ आदमी सोचते होकि उनकी रचनाओं का वास्तविक लेखकमैं ही हूं। मैं इनकार नहीं करता क्योंकि रचनाओं में साहित्यिक सजावट मेरी है लेकिन विचार और लेखन सर्वथा उन्हीं के होते हैं। …

अभागा पेंटर

कपिल ईसापुरी दोनों वकीलों ने फिर से काफी देर तक गरमागरम बहस की। इस बीच जज महेन्द्र के चेहरे के हाव-भाव को पढ़ने की कोशिश कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि जज किसी अन्तिम फैसले की तरफ बढ़ने का प्रयास कर रहा है। “आप अपनी सफाई में कुछ कहना चाहते हैं महेन्द्र बाबू।”जज …

यहाँ नहीं तो कोई रास्ता वहाँ होगा

आनन्दवर्धन द्विवेदी ग़ज़ल उर्दू की एक ऐसी आज़माई हुई कविता कहने की शैली है जिसे बड़े-बड़े उर्दू के उस्ताद शायरों ने अपनी प्रतिभा और भाषा तथा अभिव्यंजनाओं की एक-से-एक बेजोड़ अनुपमेय विशिष्टताओं के खाद-पानी से सींचा-संवारा है, जिससे समय की शताब्दियों लम्बी अनगढ़ यात्रा के बीच जिसके पुष्पों के रंग और पराग की सुगंध म्लान …

‘गॉडफादर’ पर कब्जे की होड़

अभिषेक कश्यप यह समझने में मुझे थोड़ा वक्त लगा कि राजेन्द्र जी की भक्त मंडली में शामिल मेरे दोस्त युवा/नवोदित लेखक-लेखिकाओं के बीच राजेन्द्र यादव उर्फ गॉडफादर पर कब्जे की होड़ मची है। ये भक्तगण ‘हंस’ कार्यालय से लेकर सार्वजनिक समारोहों तक गॉडफादर से चिपके रहते। वे उनकी हर बात में हुँकारी भरते, चक्कलस करते, …

कल्लू

हरजीत सिंह 5 जनवरी 1959 को देहरादून में जन्मे हरजीत का जीवन लगभग चालीस साल का रहा। 22 अप्रैल 1999 को दमे के अटैक ने हरजीत को हमसे दूर कर दिया परंतु अल्पायु जीवन में ही हरजीत इतना काम कर गया कि उसे भुलाया नहीं जा सकता। हरजीत बहुआयामी प्रतिभावान था। बेहतरीन ग़ज़लगो। उसके जीवन …

वह एक और मन रहा राम का जो न थका

वरिष्ठ आलोचक मैनेजर पाण्डेय जी के जन्मदिन पर विशेष प्रस्तुति डॉ. अर्चना त्रिपाठी सुप्रसिद्ध आलोचक पाण्डेय जी एक व्यक्ति नहीं एक संस्था हैं । ज्ञान के जीते जागते इनसाइक्लोपिडिया । ऐसे अप्रितम महापुरुष जन्म से नहीं कर्म से बनते हैं । पाण्डेय जी ने  शिक्षण- संस्थाओं को सींचा है उसका उर्ध्वगामी विकास किया है । …

हिंदी की दीप शिखा महादेवी क्या एक मुस्लिम से प्रेम करती थीं?

विमल कुमार (महादेवी की पुण्यतिथि पर) क्या महादेवी वर्मा किसी मुस्लिम युवक से प्रेम करती थी और उससे वह उससे शादी करना चाहती थी? क्या इसके लिए उनके पिता ने धर्म परिवर्तन की बात कही थी? क्या इस घटना का असर महादेवी वर्मा के जीवन पर पड़ा था और उसकी गहरी पीड़ा उनकी कविता में …

कथाकार राकेश मिश्र को एम.एस. सिग्नेचर अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड

डॉ. राकेश मिश्र को अन्‍तराष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रतिष्ठित एम.एस. सिग्‍नेचर अवार्ड 2020 से सम्‍मानित किया गया है। चिकित्‍सा विज्ञान, शैक्षणिक नवोन्‍मेष, कला संस्‍कृति, समाज सेवा आदि के क्षेत्र में दिया जाने वाला यह सम्‍मान डॉ. मिश्र को गांधी अध्‍ययन एवं शांति शोध के क्षेत्र में विशिष्‍ट योगदान के लिये दिया गया है। ध्‍यातव्‍य है कि डॉ. राकेश …

व्यक्तिगत प्रयास से गाँव को मिला अपना पुस्तकालय

लगभग हर गाँव में ऐसी बहुत-सी प्रतिभाएं होती हैं जो तरह-तरह की किताबें पढ़ना तो चाहती हैं, लेकिन पढ़ नहीं पाती हैं। ऐसे में अपने गाँव में लाइब्रेरी शुरू करने का बीड़ा उठाया अवशेष चौहान ने। अवशेष ने बताया कि वैसे भी आजकल गांव में पढ़ने का माहौल कम होता जा रहा है। इसी कारण …