सवालों में कथाकार

ललित कुमार श्रीमाली हिंदी के सुप्रसिद्ध कथाकार-उपन्यासकार स्वयं प्रकाश के साक्षात्कारों की पुस्तक कहा-सुना में पिछले बीस वर्षों की अवधि में लिए गए उन्नीस साक्षात्कारों का संकलन है। इन साक्षात्कारों से न केवल स्वयं प्रकाश के साहित्य को समझने में मदद मिलती है अपितु हम इसके माध्यम से इस समय व समाज को भी समझ सकते …

स्याह गलियों का रोज़नामचा

“ये बार डांसर…हाड़-मांस की नहीं बनी. ये तो सिर्फ नखरों से बनीं हैं. कुछ ख़ास बारों में ये आ कर आपकी बगल में बैठ जाएँगी और कहेंगी- हेल्लो हेन्सम, क्या मैं तुम्हारा सेल इस्तेमाल कर सकती हूँ या हाय स्वीटी तुम कैसे हो? और स्वाभाविक है कि आप उत्तेजित हो जायेंगे”

गंगेश्वरी

भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित विश्वविख्यात  सितारवादक पंडित रविशंकर की आत्मकथा ‘राग माला’ से एक अंश. वह सारा संसार जहाँ बनारस में मैं पैदा हुआ था एक ऐसे भारत की तरह था जो दो हज़ार वर्ष पूर्व का था। कुछ मोटरगाडिय़ों, साइकिलों और आधुनिकता के छोटे-बड़े चिह्नïों को छोड़, जो मेरी चारों तरफ थे, हर वस्तु …

मैं भी मुंह में जुबान रखता हूँ

हिन्दी के वरिष्ठ आलोचक प्रो. मैनेजर पांडेय के व्यक्तित्व और कृतित्व पर पर केन्द्रित वृतचित्र निर्देशन : महेश्वर, पटकथा : अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, स्वर : आरजे दिलीप सिंह सम्पादन : कपिल शर्मा निर्माता : रेखा श्रीवास्तव, प्रस्तुति : स्वपन कम्युनिकेशन