हिन्दी लघुकथा के सौन्दर्यशास्त्र की पड़ताल

डॉ. जितेन्द्र ‘जीतू’ समान्तरकोश में सौन्दर्य और शास्त्र दोनों शब्दों के पर्यायवाची मिलते हैं। सौन्दर्य का अर्थ हैंः कलापूर्णता, काव्यलंकार और सुन्दरता। कलापूर्णता के अर्थ हैंः अलंकारपूर्णता, रसपूर्णता, कलात्मकता। काव्यलंकार के अर्थ हैंः अलंकार, सौन्दर्य। सुन्दरता के अर्थ हैः सौन्दर्य, लालित्य। इसी तरह शास्त्र के अर्थ हैंः धर्मग्रन्थ, पुस्तक, विज्ञान, शास्त्र और सिद्धान्त। अतः सौन्दर्यशास्त्र …

घने अंधकार में रोशनी की तलाश

प्रेम नंदन वत्स आज सत्य के कई रूप हो गए हैं। जहाँ तक हमारी दृष्टि जा पाती है, हम उस सत्य तक उतना ही पहुँच पाते हैं। आज कई सारी बातें आपस में धागों की तरह उलझी हुई हैं। इन उलझे हुए सत्यों के धागों के सिरों को पकड़कर सुलझाने की कोशिश है उमाशंकर चौधरी …

साधारण के स्वप्न, संघर्ष और स्वप्नभंग की त्रासद कथा

पंकज मित्र एक निम्न मध्यम वर्गीय आदमी का सपना होता है एक घर का। यह सपना वैसा नहीं है कि “इक घर बनाऊँगा तेरे घर के सामने”। यह घर कहीं भी बन सकता है खासतौर पर जब यह सपना कई पीढ़ियों से देखा जा रहा हो। घर बदर आदमी कुंदन दुबे के लिए यह सपना …

लोक का पुनर्जागरण

प्रशांत खत्री गन आइलैंड से पहले जल-वायु परिवर्तन पर अमिताव घोष की पुस्तक द ग्रेट दीरेंज्मेंट: क्लाइमेट चेंज एंड द अन्थिकेबल में उन्होंने इस बात की चर्चा की है कि अमेरिका में जल-वायु परिवर्तन पर यदि किसी संस्था में सबसे ज्यादा शोध हो रहा है तो वह कोई शोध-संस्था नहीं बल्कि पेंटागन है जो कि …

कथा साहित्य को एक अनुपम भेंट है यह उपन्यास

महेश जोशी फ़ेसबुक पर मित्रता में कभी-कभार विचित्र अनुभव होते हैं : प्रियदर्शी ठाकुर को मित्र बनाने का प्रस्ताव उन्हें स्वर्गीय जनार्दन ठाकुर का पुत्र जानकर भेजा, किन्तु निकले वे उनके छोटे भाई। लगभग चालीस वर्ष पहले जनार्दन ठाकुर अंग्रेज़ी के जाने-माने पत्रकार व पोलिटिकल कमेंटेटर थे और हम ‘नई दुनिया’ में उनके आलेखों के …

क्या यूरोपीय पुनर्जागरण के महानायक लियोनार्दो दा विंची भी समलैंगिक थे?

विमल कुमार संभव है आप लोगों में कुछ लोगों को यह जानकर आश्चर्य लगे पर उनके बारे में यह कोई नया रहस्योद्घाटन नहीं है बल्कि उनके कई जीवनीकारों ने इस बारे में लिखा है। विंची पर सोडोमी यानी गुदासंसर्ग का भी आरोप 1476 में लगा था पर अदालत में सबूत के अभाव में उन्हें बरी …

काल्पनिक नहीं.. कल्पनाशील कथाएँ

उपमन्यु गर्ग बेस्टसेलर का अंग्रेज़ी तमग़ा हासिल करने के लिए हिन्दी साहित्य में क्रमशः वही स्थिति उत्पन्न होती जा रही है जो चेतन भगत के बाद इंग्लिश में हुई. जैसे एक तय फ़ार्मूला हाथ लग गया है जो वेब सीरीज़ में आए मार्केट बूम को भी भुना लेना चाहता है इसलिए उसको भी लक्ष्य करके …

हिंदी का पहला घर फोर्ट विलियम कॉलेज

विमल कुमार आज हम लोग जिस हिंदी को बोलते सुनते हैं और जिस में साहित्य का सृजन करते हैं, उस हिंदी की कहानी कोलकाता के एक कालेज से हुई थी जिसका नाम फोर्ट विलियम कॉलेज था। वह हिंदी का पहला घर था।तब किसी ने कल्पना नही की होगी कि कालांतर में हिंदी के कई घर …

अपने अंत:पुर से बाहर आती स्‍त्री

[स्‍त्रीवाद, स्‍त्री-चिंतन और कविता के आयाम] कविता में स्‍त्री प्रत्‍यय-भाग 2 ओम निश्‍चल ‘कविता में स्‍त्री प्रत्‍यय’  जहां स्‍त्री कविता का एक विहंगम अध्‍ययन अनुशीलन था वहीं उसके पीछे स्‍त्रीवाद की वैचारिकी और स्‍त्री चिंतन की अपनी सुचिंतित भूमिका रही है। केवल भारतीय स्त्रीचिंतकों के बलबूते आज की कविता में स्‍त्रीवाद इतना मुखर नहीं हुआ …

क्या मृत्यु भी एक कला है?

विमल कुमार प्रसिद्ध गांधीवादी पत्रकार एवं गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने पिछले दिनों रजा फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर बोलते हुए कहा था कि जिस तरह गांधी जी का जीवन अपने में आप में एक संदेश था, उसी तरह उनकी मृत्यु भी एक संदेश थी। गांधी जी का …

कविता में स्‍त्री प्रत्‍यय

ओम निश्‍चल जैसे जैसे कविता कला व संगीत में लोकतांत्रिकता का प्रसार हुआ है, स्‍त्री की महत्‍ता को संज्ञान में लिया गया है, वह सार्वजनिक क्षेत्र में अपने सामर्थ्‍य के ज्ञापन के साथ सामने आई है। वह अन्‍य सार्वजनिक सेवाओं की तरह ही कविता कला की दुनिया में भी हस्‍तक्षेप के साथ दर्ज हो रही …

क्या हिंदी नवजागरण स्त्री विरोधी था?

विमल कुमार क्या आपने 1908 में श्रीमती प्रियंबद देवी का उपन्यास ‘लक्ष्मी’ पढ़ा? शायद नही पढ़ा होगा। यह भी संभव है आपने इसका नाम भी नहीं सुना हो। क्या आपने 1909 में श्रीमती कुंती देवी का उपन्यास ‘पार्वती’ और 1911 में श्रीमती यशोदा देवी का उपन्यास ‘सच्चा पति प्रेम’ और 1912 में श्रीमती हेमंत कुमारी …

क्या आपने रूमी की शायरी पढी है?

विमल कुमार       (मैं क्या करूं, ऐ मुसलमानों! मैं खुद अपने आप को नहीं पहचानता। न मैं ईसाई हूँ, यहूदी न अग्निपूजक  और नहीं मुसलमान। ना मैं पूरब का हूं ना पश्चिम का, ना धरती का न सागर का न मैं प्रकृति द्वारा गढ़ा  गया हूं और ना ही मंडरानेवाला आसमान से आया हूं। न …

‘परम प्रेम’ का तिलिस्मी शीशा : आन्ना कारेनिना

मनीषा कुलश्रेष्ठ आन्ना कारेनिना लिखे जाने के दौरान दर्ज की गईं अपनी आत्मस्वीकारोक्तियों में तॉल्स्तोय लिखते हैं— “हर बार, जब भी मैं ने अपनी गहन इच्छाओं के तहत, नैतिक स्तर पर अच्छा अभिव्यक्त करने की कोशिश की – मैं अवमानना तथा तिरस्कार से गुज़रा. फिर जब-जब मैंने मूल प्रवृत्तियों पर लिखा, मुझे प्रशंसा व प्रोत्साहन …