पुस्तकनामा

कबीर के आहृवान की भूमिका

सुनील कुमार युवा कवि, कथाकार, आलोचक भरत प्रसाद की चुनी हुई कविताओं का संग्रह ‘पुकारता हूँ कबीर’ समाज के कई मुद्दों को आईना दिखाती हुई नजर आती है। अमन प्रकाशन से प्रकाशित इस काव्य संग्रह की प्रत्येक कविताओं में समाज से टकराहट की अनुगूँज सुनाई पड़ती है। महात्मा कबीर केवल संत कवि ही नहीं थें …

शैलेन्द्र : होठों पर सचाई और दिल में सफाई का अमर कवि, गीतकार

संजीव श्रीवास्तव सिनेमा में साहित्य से सीधा सरोकार रखने वाले लेखकों, कवियों की संख्या कभी कम नहीं रही। शैलेन्द्र ऐसे ही कवि, गीतकार थे जिनकी शख्सियत को आम सिनेमा प्रेमियों से लेकर सरोकारी साहित्यकारों के बीच भी प्रतिष्ठा हासिल थी। संभवत: शैलेन्द्र अकेले ऐसे गीतकार हुए जिनकी लेखनी पर नामधन्य साहित्यकारों ने भी काफी लिखा …

संघर्ष में लय की खोज की कवितायेँ– ‘क्षीरसागर में नींद’

अनिल कुमार पाण्डेय कविता में जब जन-सरोकारों के संरक्षण की बात आएगी तो कवि की निष्क्रियता एवं निष्पक्षता को लेकर सवाल किया जाएगा. किसी भी देश के सांस्कृतिक समाज और सामाजिक संस्कृति की समृद्धि कवि-विवेक और कविता-सामर्थ्य पर निर्भर करता है. जनसामान्य यहाँ एक हद तक उत्तरदायी नहीं होता जितने कि बुद्धिजीवी. साधारण जनता से …

सामाजिक सरोकारों की कहानियों का अनूठा संग्रह

दीपक गिरकर “प्रवास में आसपास” सुपरिचित प्रवासी कथाकार डॉ. हंसा दीप का दूसरा कहानी संग्रह है। डॉ. हंसा दीप टोरंटो में कई वर्षों से रह रही हैं। वे अमेरिकी-कनाडा संस्कृति से अच्छी तरह से परिचित होने के बावजूद अपनी भारतीय संस्कृति तथा भारतीय रीति-रिवाजों को नहीं भूली हैं। भारत के मेघनगर (जिला झाबुआ, मध्यप्रदेश) में …

साहित्य की सही रेसिपी

धर्मपाल महेंद्र जैन इन दिनों साहित्य में रस नहीं रहा, निचुड़ गया है। साहित्य क्विंटलों में छप रहा है और सौ-दो सौ ग्राम के पैकेट में बिक रहा है। जगह-जगह पुस्तक मेलों में बिक रहा है पर रसिकों को मज़ा नहीं आ रहा। साहित्य को सर्वग्राही होना चाहिये, समोसे जैसा होना चाहिये। जहाँ प्लेटें उपलब्ध हों वहाँ …

मज़दूरों जीवन की पीड़ा का आख्यान : धर्मपुर लॉज

राजनारायण बोहरे “धर्मपुर लॉज” उस पीरियड उपन्यास का नाम है जो कथाकार प्रज्ञा ने  दिल्ली की सब्जी मंडी, मुकीम पुरा, बिरला मिल, घंटा घर और आसपास के जनजीवन पर लिखा है । इस उपन्यास का कालखंड सन 1980 से 1998 के बीच का है।  धर्मपुर लॉज उस भवन का नाम है, जो कि बिरला मिल …

सवालों में कथाकार

ललित कुमार श्रीमाली हिंदी के सुप्रसिद्ध कथाकार-उपन्यासकार स्वयं प्रकाश के साक्षात्कारों की पुस्तक कहा-सुना में पिछले बीस वर्षों की अवधि में लिए गए उन्नीस साक्षात्कारों का संकलन है। इन साक्षात्कारों से न केवल स्वयं प्रकाश के साहित्य को समझने में मदद मिलती है अपितु हम इसके माध्यम से इस समय व समाज को भी समझ सकते …

गंगेश्वरी

भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित विश्वविख्यात  सितारवादक पंडित रविशंकर की आत्मकथा ‘राग माला’ से एक अंश. वह सारा संसार जहाँ बनारस में मैं पैदा हुआ था एक ऐसे भारत की तरह था जो दो हज़ार वर्ष पूर्व का था। कुछ मोटरगाडिय़ों, साइकिलों और आधुनिकता के छोटे-बड़े चिह्नïों को छोड़, जो मेरी चारों तरफ थे, हर वस्तु …